फिल्म समीक्षा-प्यार का पंचनामा 2
प्यार का पंचनामा … एक ऐसी फिल्म है जिससे शायद ही किसी युवक न देखा हो। आज से करीब चार साल पहले यंग डायरेक्टर लव रंजन के निर्देशन में बनी प्यार का पंचनामा रिलीज हुई तो पहले दिन की बॉक्स ओपनिंग बेहद कमजोर रही। लेकिन क्रिटिक्स रिव्यू आने के बाद यंगस्टर्स ने इस फिल्म को हाथोंहाथ लिया। शायद आपको भी पता होगा की बाद में, इस फिल्म को २०११ के बेहतरीन फिल्मो के लिस्ट में ऐड कर लिया गया था।
अब बात करते इस हफ्ते आयी लव रंजन के निर्देशन में बनी ''प्यार का पंचनामा२ '' की। अगर इस फिल्म की कहानी की बात की जाये तो,
तीन दोस्तों पर बनी ये फिल्म ..... अंशुल गोगो (कार्तिक आर्यन), सिद्धार्थ उर्फ चौका (सनी सिंह) और तरुण उर्फ ठाकुर (ओंकार कपूर) के आसपास फिल्म घूमती हुई नज़र आती है। बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों में तीनों अच्छी सैलरी वाली जॉब कर करते हैं। फैमिली से दूर दिल्ली के पॉश एरिया में तीनों एक आलीशान फ्लैट में साथ रहते हैं। इन तीनों को तलाश है सच्चे प्यार और अपने लिए लाइफ पार्टनर की, सो तीनों के बीच अक्सर इसी बात को लेकर बहस होती रहती है कब किसकी लाइफ में खूबसूरत लड़की की एंट्री होगी। अचानक इन तीनों की लाइफ में रुचिका उर्फ चीकू (नुसरत भरूचा), सुप्रिया (सोनाली सहगल) और कुसुम (इशिता शर्मा) आती हैं। तीनों को लगता है अब उनकी लाइफ भी मस्ती औैर रोमांस के साथ गुजरने वाली है। कुसुम पर अपना दिल हार चुके ठाकुर साहब का क्रेडिट कार्ड उसकी फरमाइशें पूरी करने में ब्लॉक हो जाता है। चौका जब सुप्रिया को अपनी पत्नी बनाने का सपना लिए उसके घर पहुंचता है उसके पापा, रंधावा साहब (शरत सक्सेना) और मम्मी को एक ऐसा फ्री का नौकर मिल जाता है जो उनके किचन में गैस सिलेंडर पहुंचाने के साथ सुप्रिया की मम्मी को शॉपिंग कराने के काम में बिजी हो जाता है। रुचिका यानी चीकू से मिलने के बाद अंशुल को लगता है उसे अपने सपनों की रानी मिल गई, दिनभर चीकू के नखरे उठाने में लगे गोगो को उस वक्त जबर्दस्त झटका लगता है जब चीकू के बचपन का एक दोस्त उसकी जिदंगी में लौटता है।
ऐक्टिंग
फिल्म की तीनों लीड जोड़ियों में नजर आए सभी स्टार्स ने बेहतरीन परफॉर्म किया है। तारीफ करनी होगी कार्तिक आर्यन की जिन्होंने एकबार फिर साबित किया की ऐक्टिंग की एबीसी से लेकर एक्स वाई जेड तक की उन्हें समझ है। गोगो पर फिल्माया एक लंबा संवाद हॉल में बैठे दर्शकों को तालियां बजाने के लिए मजबूर करता है। गोगो के किरदार में कार्तिक ने बेस्ट परफॉर्मेस दी है।
डायरेक्शन
लव रंजन ने ऐसी स्क्रिप्ट पर अच्छा काम किया है जो बेचारे बैचलर्स के दर्द को उजागर करती है। सीक्वल को बनने में चार साल का वक्त लगा, ऐसा लगता है इस बीच रंजन ने लड़कियों की पसंद और उनके मूड पर अच्छी रिसर्च की है। इस बार किरदारों के नाम ज्यादा कैची हैं।
संगीत :
पिछली फिल्म का ट्रैक इस फिल्म में भी बैकग्रांउड में सुनाई देता है, अगर गाने कम कर दिए जाते तो फिल्म की रफ़्तार ज्यादा तेज हो सकती थी।
क्यों देखें :
अगर आप किसी रिलेशनशिप में हैं या फिर मैरिड हैं तो यह फिल्म आपके लिए है। यूथ को यह काफी पसंद आने वाली है। सभी कलाकारों की बेहतरीन एक्टिंग फिल्म की यूएसपी है। फिल्म अडल्ट है। साफ सुथरी फिल्में देखने वालों की कसौटी पर खरी नहीं उतरेगी।
अब बात करते इस हफ्ते आयी लव रंजन के निर्देशन में बनी ''प्यार का पंचनामा२ '' की। अगर इस फिल्म की कहानी की बात की जाये तो,
तीन दोस्तों पर बनी ये फिल्म ..... अंशुल गोगो (कार्तिक आर्यन), सिद्धार्थ उर्फ चौका (सनी सिंह) और तरुण उर्फ ठाकुर (ओंकार कपूर) के आसपास फिल्म घूमती हुई नज़र आती है। बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों में तीनों अच्छी सैलरी वाली जॉब कर करते हैं। फैमिली से दूर दिल्ली के पॉश एरिया में तीनों एक आलीशान फ्लैट में साथ रहते हैं। इन तीनों को तलाश है सच्चे प्यार और अपने लिए लाइफ पार्टनर की, सो तीनों के बीच अक्सर इसी बात को लेकर बहस होती रहती है कब किसकी लाइफ में खूबसूरत लड़की की एंट्री होगी। अचानक इन तीनों की लाइफ में रुचिका उर्फ चीकू (नुसरत भरूचा), सुप्रिया (सोनाली सहगल) और कुसुम (इशिता शर्मा) आती हैं। तीनों को लगता है अब उनकी लाइफ भी मस्ती औैर रोमांस के साथ गुजरने वाली है। कुसुम पर अपना दिल हार चुके ठाकुर साहब का क्रेडिट कार्ड उसकी फरमाइशें पूरी करने में ब्लॉक हो जाता है। चौका जब सुप्रिया को अपनी पत्नी बनाने का सपना लिए उसके घर पहुंचता है उसके पापा, रंधावा साहब (शरत सक्सेना) और मम्मी को एक ऐसा फ्री का नौकर मिल जाता है जो उनके किचन में गैस सिलेंडर पहुंचाने के साथ सुप्रिया की मम्मी को शॉपिंग कराने के काम में बिजी हो जाता है। रुचिका यानी चीकू से मिलने के बाद अंशुल को लगता है उसे अपने सपनों की रानी मिल गई, दिनभर चीकू के नखरे उठाने में लगे गोगो को उस वक्त जबर्दस्त झटका लगता है जब चीकू के बचपन का एक दोस्त उसकी जिदंगी में लौटता है।
ऐक्टिंग
फिल्म की तीनों लीड जोड़ियों में नजर आए सभी स्टार्स ने बेहतरीन परफॉर्म किया है। तारीफ करनी होगी कार्तिक आर्यन की जिन्होंने एकबार फिर साबित किया की ऐक्टिंग की एबीसी से लेकर एक्स वाई जेड तक की उन्हें समझ है। गोगो पर फिल्माया एक लंबा संवाद हॉल में बैठे दर्शकों को तालियां बजाने के लिए मजबूर करता है। गोगो के किरदार में कार्तिक ने बेस्ट परफॉर्मेस दी है।
डायरेक्शन
लव रंजन ने ऐसी स्क्रिप्ट पर अच्छा काम किया है जो बेचारे बैचलर्स के दर्द को उजागर करती है। सीक्वल को बनने में चार साल का वक्त लगा, ऐसा लगता है इस बीच रंजन ने लड़कियों की पसंद और उनके मूड पर अच्छी रिसर्च की है। इस बार किरदारों के नाम ज्यादा कैची हैं।
संगीत :
पिछली फिल्म का ट्रैक इस फिल्म में भी बैकग्रांउड में सुनाई देता है, अगर गाने कम कर दिए जाते तो फिल्म की रफ़्तार ज्यादा तेज हो सकती थी।
क्यों देखें :
अगर आप किसी रिलेशनशिप में हैं या फिर मैरिड हैं तो यह फिल्म आपके लिए है। यूथ को यह काफी पसंद आने वाली है। सभी कलाकारों की बेहतरीन एक्टिंग फिल्म की यूएसपी है। फिल्म अडल्ट है। साफ सुथरी फिल्में देखने वालों की कसौटी पर खरी नहीं उतरेगी।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें