मेरा  जीवन ………………
उगलता-सुलगता है मेरा जीवन ,
कभी  इस  डाल पर,तो कभी उस डाल  पर !
उछलता  है  मेरा जीवन ।।
कभी चलता हूँ , कभी  थमता  हुँ ।
फिर चलने लगता  हुँ.……
ऐसा कुछ है , मेरा जीवन।।
चाह कर भी कुछ कर  न सकता
जी  चाहे की , अब दम  तोड़े ,
पर तोड़  न  पाता , मेरा  जीवन।।
पता  न  कल का  मुझें ,
शायद  यही सोचता है मेरा जीवन। ।

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