व्यापम भर्ती घोटाला
व्यापम भर्ती घोटाला
व्यापम भर्ती घोटाला यानी मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा भर्ती घोटाला. इस घोटाले में कई बड़े नाम सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं. 100 से ज्यादा आरोपियों की गिरफ्तारी कोशिश में जुटी है एसटीएफ. खुद हाईकोर्ट इस मामले की जांच पुलिस की स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम से करवा रही है और हर खुलासा चौंका रहा
है.
- सरकारी नौकरी में 1000 फर्जी भर्तियां
- मेडिकल कॉलेज में 514 फर्जी भर्तियों का शक
- भर्ती घोटाले में पूर्व मंत्री गिरफ्तार
- पूर्व मंत्री के ओएसडी भी गिरफ्तार
- मुख्यमंत्री का पूर्व ओएसडी जांच के घेरे में
- 100 से ज्यादा लोगों को आरोपी बनाया गया
कितना बड़ा है मध्य प्रदेश का भर्ती घोटाला. अंदाजा लगाइए महज 11 महीने में एसटीएफ ने 100 से ज्यादा लोगों को आरोपी बनाया है और जांच जारी है. मंत्री से लेकर अधिकारियों तक, प्रिंसिपल, छात्र और दलाल–एक के बाद एक गिरफ्तारियां हो रही हैं लेकिन ये एक ऐसा नेटवर्क जिसका
ओर-छोर अब भी नहीं मिल पा रहा है. ये मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा घोटाला साबित
हो सकता है. आखिर कौन है इस भर्ती घोटाले का मास्टरमाइंड और कैसे हुआ
भर्तियों का फर्जीवाड़ा?
16 जून को मध्य प्रदेश के पूर्व
उच्च शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया. लक्ष्मीकांत शर्मा बतौर उच्च शिक्षा मंत्री मध्य प्रदेश के व्यावसायिक परीक्षा मंडल के भी मुखिया थे और आरोप ये था कि
उनके ही आशीर्वाद से मध्य प्रदेश में बरसों से फर्जी भर्तियों का
धंधा चल रहा है.
लक्ष्मीकांत शर्मा
की गिरफ्तारी तो सिर्फ शिक्षकों की भर्ती
के मामले में हुई है और बाकी मामलों की जांच चल रही है. लेकिन भर्ती घोटाला सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है. भर्ती घोटाले के दो अहम हिस्से हैं.
- मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले का फर्जीवाड़ा
- सरकारी नौकरियों में भर्ती का फर्जीवाड़ा
अब तक मिली जानकारी में मुताबिक मेडिकल कॉलेजों में ही भर्ती
के 514 मामले शक के घेरे में हैं.
वहीं सरकारी नौकरियों में 1000 भर्ती की बात खुद शिवराज सिंह चौहान विधानसभा में मान चुके हैं. 2008 से 2010 के बीच सरकारी नौकरियों के 10 इम्तिहानों में धांधली का भी आरोप है.
मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों के एडमिशन का सीधा जिम्मा उच्च
शिक्षा मंत्रालय के पास था लेकिन
सरकारी नौकरियों में भर्ती की परीक्षाएं भी इसी विभाग के जरिए करवाई जाती थीं. ऐसे में पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा की भूमिका पर उठ रहे हैं सवाल. आरोप ये भी है कि लक्ष्मीकांत शर्मा ने
अपने रसूख का इस्तेमाल करके दूसरी भर्तियों में भी दखल देते थे.
तो क्या सब कुछ लक्ष्मीकांत शर्मा के इशारे पर ही हो रहा था? इसका जवाब पाने के लिए हमें जरा
पीछे चलना होगा. भर्ती घोटाले का पर्दा करीब साल भर पहले उठा था जब 7 जुलाई, 2013 को मध्य प्रदेश के
इंदौर में पीएमटी की प्रवेश परीक्षा में कुछ
छात्र फर्जी नाम पर परीक्षा देते पकड़े गए. इनसे पूछताछ में सामने आया डॉ जगदीश सागर का नाम.
छापेमारी के दौरान तस्वीरों में दिख रहा यही शख्स है डॉक्टर जगदीश
सागर. ग्वालियर के रहने वाले जगदीश सागर ने पत्नी का मंगलसूत्र बेचकर
डॉक्टरी की पढ़ाई की थी. 12 वीं में ही शादी करने लेने वाले जगदीश ने देखते ही देखते जो साम्राज्य खड़ा किया उसके पीछे मेडिकल इंट्रेस में
फर्जीवाड़े का बड़ा हाथ था. जगदीश सागर के
घर पर छापेमारी में गद्दों के भीतर 13 लाख की नगदी मिली. इतना ही नहीं 20 प्रॉपर्टी और करीब 4 किलो सोने के गहने भी मिले. ये बड़ी मछली थी.
जगदीश सागर से
पूछताछ में हुआ भर्ती घोटाले का पहला बड़ा खुलासा जिसके मुताबिक-
- परिवहन विभाग में कंडक्टर पद के लिए 5 से 7 लाख
- फूड इंस्पेक्टर के लिए 25 से 30 लाख
- और सब इंसपेक्टर की भर्ती के लिए 15 से 22 लाख रुपये लेकर फर्जी तरीके से नौकरियां बांटी जा रही थीं
पहले शिकार बने और अब गिरफ्तार हो रहे हैं ऐसे छात्र और नौकरी
पाने की ख्वाहिश रखने वाले आम लोग. शिवराज सिंह चौहान के चहेते मंत्री और
आरएसएस के करीबी लक्ष्मीकांत शर्मा तक पहुंचने में जगदीश सागर की ये गवाही
ने अहम साबित हुई.


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