मैरी कॉम के कुछ गीत ................दर्शकों के लिए सुखद अनुभूति ...................
खेलों पर या यों कहें नामचीन खिलाडि़यों के जीवन पर भी फिल्म बन सकती है, ऐसा अब बालीवुड मानने लगा है। संजय लीला भंसाली खुले विचारों के और सुलझे हुए निर्देशक हैं। बतौर निर्माता उन्होंने मैरी कॉम के निर्माण के लिए चुनौती कबूल की, इसके लिए वे प्रशंसा के पात्र हैं। प्रियंका चोपड़ा ने पिछले कुछ सालों में अपने अभिनय की छाप छोड़ी है। वे बेहद ग्लैमर वाली अभिनेत्री हैं। मगर फिल्म बर्फी में जिस तरह उन्होंने अपने अभिनय का लोहा मनवाया, वह सभी देख चुके हैं। इस बार उन्होंने ओलंपियन मुक्केबाज मैरी कॉम के जीवन को अपने चरित्र में जिस तरह ढाला है, वह चौंकाता है। वहीं उन्होंने इस फिल्म के एक गीत में स्वर देकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का ही परिचय दिया है।
खेल आधारित फिल्म पर संगीत रचना मुश्किल भरा काम है। हालांकि चक दे इंडिया और भाग मिल्खा भाग में श्रोता अच्छा गीत-संगीत सुन चुके हैं। जाहिर है कि उम्मीदें मैरी कॉम से भी रही। इसके लिए संगीत शशि सुमन और शिवम ने रचे हैं। शशि गायक हैं और नवोदित संगीतकार भी। उनका अभी संक्षिप्त कॅरियर है। उन्हें अभी ज्यादा मौके नहीं मिले, पर जो भी मिले वे महत्वपूर्ण थे। फिल्म राजनीति और रामलीला में उनके काम को बालीवुड ने परखा है। रियलिटी शो से शुरू हुआ उनका कॅरियर आज एक अहम मुकाम पर है।
मैरी कॉम के म्यूजिक एलबम में कुल सात ट्रैक हैं और इसके लिए प्रशांत इंगोले और संदीप सिंह ने गीत लिखे हैं। एलबम में कुल सात ट्रैक हैं। शुरूआत जिद्दी दिल से हुई है, जिसे गाया है हरफनमौला विशाल डडलानी ने। शशि सुमन के संगीत में गुंथे इस ट्रैक को सुनना अच्छा लगता है। यह एक प्रेरक गीत है, जिसे विशाल ने अपने प्रभावशाली स्वर से सुनने के लिए बाध्य कर दिया है। निराशा के दौर से गुजर रहे श्रोताओं को यह गीत सुनकर कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलेगी- देखे हैं, आंखों में किस्मत की आंखें डाले… हे हवा के कानों में जा के कहे किस्मत मिट्टी है, तू बहुत जिद्दी है, दिल ये जिद्दी है…। शशि वाद्वों का बोझ न रखते तो यह गीत सुखद बन सकता था।
अगला सुकून मिला जरूर सुखद गीत बन पड़ा है। इसका श्रेय अरिजीत सिंह को जाता है। संदीप सिंह के लिखे इस गीत को शशि ने मधुर संगीत देने की कोशिश की है। रोमानी गीत सुनने वाले श्रोता इसे बार-बार सुनना चाहेंगे- मिला हूं जो ऊब तुमसे, है दिल को मेरे कसम से सुकून मिला, सुकून मिला…। तुझे है माया रब से, है दिल को मेरे काम से सुकून मिला…। संदीप की शब्दरचना वाकई सुकून देती है वहीं शशि ने अपने संगीत से पूरी मिठास घोल दी है। यह एलबम की कर्णप्रिय गीत है।
तीसरे गीत अधूरे को सुनना भी सुखद लगता है। प्रशांत इंगोले की शब्दरचना अर्थपूर्ण तो है ही, शशि ने भी गिटार की धुन के साथ समां बांध दिया है। अलबेली गायिका सुनिधि चौहान ने अपने स्वर से गीत को कर्णप्रिय बना दिया है। लीजिए आप भी सुनें- गीला गीला पानी बस पलकों पे रह गया, धीरे-धीरे सपना वो आंखों से बह गया, थोड़ा-थोड़ा कर यादें सारी खो रहीं, टूटा सा फल इक हाथ में रह गया, हम हैं अधूरे, लम्हे अधूरे, सवाल अधूरे, जवाब अधूरे रह गए…। सुनिधि ने एक बार फिर दिल को छुआ है।
चौथा ‘तेरी बारी’ भी प्रशांत का लिखा एक और प्रेरक गीत है। शशि सुमन के संगीत पर मोहित चौहान ने अपने प्रभावशाली स्वर से इस ट्रैक को कर्णप्रिय बना दिया है। गीत, संगीत और मोहित की गायिकी का विशिष्ट अंदाज ये तीन लुभाते हैं- ऐ परिंदे यूं अब के उड़ा कर तू, जा जला सूरज को, जा आसमान में तू, ऐ परिंदे भर ऐसी उड़ानें तू, हर नजर ये तुझसे पूछे आग इतनी क्यों, धूल उड़ा जा के मंजिलों पे यूं कि इन हवाओं से तेरी यारी है, उड़ जा अब तेरी बारी है…।
पांचवां गीत सौदेबाजी भी सुनने लायक है। अरिजीत सिंह गाएं और वह कर्णप्रिय न बनें ऐसा कभी हो सकता है क्या? अलबत्ता अरिजीत गीत सुकून मिला जैसा जादू तो नहीं जगा पाए पर उससे कम भी नहीं। शशि ने अपने मधुर संगीत पर अरिजीत के स्वर को अच्छा गूंथा है। प्रशांत इंगोले के लिखे गीत को आप भी सुनें- सौदेबाजी एक हंसी की, इक हंसी से कर गए तुम बातों बातों रंग खुद के सारे मुझमें भर गए तुम…।
अगला गीत सलाम इंडिया दिलचस्प इस मायने में है कि एक नवोदित संगीतकार को बहुआयामी प्रतिभा के धनी संगीतकार-गायक विशाल डडलानी और सलीम मर्चेंट के स्वर को अपने म्यूजिक पर साधने का अवसर मिला है। देशभक्ति की भावना जगाता यह गीत किसे अच्छा नहीं लगेगा। हालांकि पूरी टीम इसे मधुर बना पाती तो यह लोकप्रिय भी हो जाता। अलबत्ता संदीप सिंह की शब्दरचना दिल में स्वाभिमान तो जगाती ही है- झुके तेरे आगे सर, तेरी गोद मेरा घर, है मुझे सलाम इंडिया, मुश्किल वक्त में भी ना खोए हौसला, मिल के साथ चलने का कर लें हौसला, मिट्टी हम जो चूमें तो मिलता जोश है…।
अंतिम चाओरो को और कोई नहीं फिल्म की अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने खुद इसे गाया है। उन्हें सुनना सुखद ही लगता है। किसी हिंदी फिल्म के लिए उन्होंने शायद पहली बार गाया है। उनके अंग्रेजी में आए एलबम को सुन चुके लोग तो प्रियंका के दीवाने हैं। गीत चाओरो वस्तुतः लोरी है, जिसे गीतकार संदीप सिंह ने लिखा है- तेरी मैं बलइयां लूं, तुझे मैं दुआएं दूं तुझको मैं खुशियों के साये दूं, ख्वाबों को सजाए तू, आंखों में बसाए तू, तुझको मैं दूं सब जो चाहे तू, सारी रात ये पहरा करे, कह दूं चांद-तारों को, चाओरो, चाओरो इचा पारी चाओरो…।
कुल मिलाकर मैरी कॉम का म्यूजिक एलबम सुनने योग्य है। यह प्रेरक है और दिल को भी छूता है। इसका श्रेय जहां गायकों को जाता है, वहीं संगीतकारों शशि सुमन और शिवम भी बधाई के पात्र हैं, जिन्होंने खेल पर आधारित फिल्म के लिए अच्छा म्यूजिक रचने की कोशिश की।
खेल आधारित फिल्म पर संगीत रचना मुश्किल भरा काम है। हालांकि चक दे इंडिया और भाग मिल्खा भाग में श्रोता अच्छा गीत-संगीत सुन चुके हैं। जाहिर है कि उम्मीदें मैरी कॉम से भी रही। इसके लिए संगीत शशि सुमन और शिवम ने रचे हैं। शशि गायक हैं और नवोदित संगीतकार भी। उनका अभी संक्षिप्त कॅरियर है। उन्हें अभी ज्यादा मौके नहीं मिले, पर जो भी मिले वे महत्वपूर्ण थे। फिल्म राजनीति और रामलीला में उनके काम को बालीवुड ने परखा है। रियलिटी शो से शुरू हुआ उनका कॅरियर आज एक अहम मुकाम पर है।
मैरी कॉम के म्यूजिक एलबम में कुल सात ट्रैक हैं और इसके लिए प्रशांत इंगोले और संदीप सिंह ने गीत लिखे हैं। एलबम में कुल सात ट्रैक हैं। शुरूआत जिद्दी दिल से हुई है, जिसे गाया है हरफनमौला विशाल डडलानी ने। शशि सुमन के संगीत में गुंथे इस ट्रैक को सुनना अच्छा लगता है। यह एक प्रेरक गीत है, जिसे विशाल ने अपने प्रभावशाली स्वर से सुनने के लिए बाध्य कर दिया है। निराशा के दौर से गुजर रहे श्रोताओं को यह गीत सुनकर कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलेगी- देखे हैं, आंखों में किस्मत की आंखें डाले… हे हवा के कानों में जा के कहे किस्मत मिट्टी है, तू बहुत जिद्दी है, दिल ये जिद्दी है…। शशि वाद्वों का बोझ न रखते तो यह गीत सुखद बन सकता था।
अगला सुकून मिला जरूर सुखद गीत बन पड़ा है। इसका श्रेय अरिजीत सिंह को जाता है। संदीप सिंह के लिखे इस गीत को शशि ने मधुर संगीत देने की कोशिश की है। रोमानी गीत सुनने वाले श्रोता इसे बार-बार सुनना चाहेंगे- मिला हूं जो ऊब तुमसे, है दिल को मेरे कसम से सुकून मिला, सुकून मिला…। तुझे है माया रब से, है दिल को मेरे काम से सुकून मिला…। संदीप की शब्दरचना वाकई सुकून देती है वहीं शशि ने अपने संगीत से पूरी मिठास घोल दी है। यह एलबम की कर्णप्रिय गीत है।
तीसरे गीत अधूरे को सुनना भी सुखद लगता है। प्रशांत इंगोले की शब्दरचना अर्थपूर्ण तो है ही, शशि ने भी गिटार की धुन के साथ समां बांध दिया है। अलबेली गायिका सुनिधि चौहान ने अपने स्वर से गीत को कर्णप्रिय बना दिया है। लीजिए आप भी सुनें- गीला गीला पानी बस पलकों पे रह गया, धीरे-धीरे सपना वो आंखों से बह गया, थोड़ा-थोड़ा कर यादें सारी खो रहीं, टूटा सा फल इक हाथ में रह गया, हम हैं अधूरे, लम्हे अधूरे, सवाल अधूरे, जवाब अधूरे रह गए…। सुनिधि ने एक बार फिर दिल को छुआ है।
चौथा ‘तेरी बारी’ भी प्रशांत का लिखा एक और प्रेरक गीत है। शशि सुमन के संगीत पर मोहित चौहान ने अपने प्रभावशाली स्वर से इस ट्रैक को कर्णप्रिय बना दिया है। गीत, संगीत और मोहित की गायिकी का विशिष्ट अंदाज ये तीन लुभाते हैं- ऐ परिंदे यूं अब के उड़ा कर तू, जा जला सूरज को, जा आसमान में तू, ऐ परिंदे भर ऐसी उड़ानें तू, हर नजर ये तुझसे पूछे आग इतनी क्यों, धूल उड़ा जा के मंजिलों पे यूं कि इन हवाओं से तेरी यारी है, उड़ जा अब तेरी बारी है…।
पांचवां गीत सौदेबाजी भी सुनने लायक है। अरिजीत सिंह गाएं और वह कर्णप्रिय न बनें ऐसा कभी हो सकता है क्या? अलबत्ता अरिजीत गीत सुकून मिला जैसा जादू तो नहीं जगा पाए पर उससे कम भी नहीं। शशि ने अपने मधुर संगीत पर अरिजीत के स्वर को अच्छा गूंथा है। प्रशांत इंगोले के लिखे गीत को आप भी सुनें- सौदेबाजी एक हंसी की, इक हंसी से कर गए तुम बातों बातों रंग खुद के सारे मुझमें भर गए तुम…।
अगला गीत सलाम इंडिया दिलचस्प इस मायने में है कि एक नवोदित संगीतकार को बहुआयामी प्रतिभा के धनी संगीतकार-गायक विशाल डडलानी और सलीम मर्चेंट के स्वर को अपने म्यूजिक पर साधने का अवसर मिला है। देशभक्ति की भावना जगाता यह गीत किसे अच्छा नहीं लगेगा। हालांकि पूरी टीम इसे मधुर बना पाती तो यह लोकप्रिय भी हो जाता। अलबत्ता संदीप सिंह की शब्दरचना दिल में स्वाभिमान तो जगाती ही है- झुके तेरे आगे सर, तेरी गोद मेरा घर, है मुझे सलाम इंडिया, मुश्किल वक्त में भी ना खोए हौसला, मिल के साथ चलने का कर लें हौसला, मिट्टी हम जो चूमें तो मिलता जोश है…।
अंतिम चाओरो को और कोई नहीं फिल्म की अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने खुद इसे गाया है। उन्हें सुनना सुखद ही लगता है। किसी हिंदी फिल्म के लिए उन्होंने शायद पहली बार गाया है। उनके अंग्रेजी में आए एलबम को सुन चुके लोग तो प्रियंका के दीवाने हैं। गीत चाओरो वस्तुतः लोरी है, जिसे गीतकार संदीप सिंह ने लिखा है- तेरी मैं बलइयां लूं, तुझे मैं दुआएं दूं तुझको मैं खुशियों के साये दूं, ख्वाबों को सजाए तू, आंखों में बसाए तू, तुझको मैं दूं सब जो चाहे तू, सारी रात ये पहरा करे, कह दूं चांद-तारों को, चाओरो, चाओरो इचा पारी चाओरो…।
कुल मिलाकर मैरी कॉम का म्यूजिक एलबम सुनने योग्य है। यह प्रेरक है और दिल को भी छूता है। इसका श्रेय जहां गायकों को जाता है, वहीं संगीतकारों शशि सुमन और शिवम भी बधाई के पात्र हैं, जिन्होंने खेल पर आधारित फिल्म के लिए अच्छा म्यूजिक रचने की कोशिश की।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें