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दिव्यम की कलम से
सत्य हार जाये , असत्य हैं।
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मार्च 19, 2015
अपने ताररुख के लिए बस इतना ही काफ़ी है, हम उस रस्ते नही चलते, जो रस्ता आम हो जाए.
अपने ताररुख के लिए बस इतना ही काफ़ी है, हम उस रस्ते नही चलते, जो रस्ता आम हो जाए.
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