दुनिया तू है रंग बिरंगी।।।।

दुनिया तू है रंग बिरंगी।।।।
इस रंग-बिरंगी दुनिया में,यदि तू ही नहीं, तो फिर क्या है ?
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सितारों में रोशन ,मेरी रोशनी है ,
रुला दे तुम्हें वो ,मेरी लेखनी है | 
अगर झूम कर मोर जंगल में नाचे,
तो उसकी वजह भी कोई मोरनी है|
हरेक फूल में जो, महक है वो मै हूँ,
सभी पक्षियों में ,चहक है वो मै हूँ |
तो फिर ये सज़ा मुझको क्यूँ दी गयी है?
तुम्हारे हैं गुलशन, कसक उसकी मैं हूँ ||--उमा कटियार[''मेरी लाल मुनिया--गीतमाला से|

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