प्रेम एक रेल है

प्रेम एक रेल है 
किसी डिब्‍बे में मेल 
किसी में पेलमपेल है ।

ठेल रहा है हर दूसरा 
हर तीसरे को और 
तीसरा चौथे को 
उससे आगे वाला 
और सबसे पहले वाला 
थामे हुए है जो 
वह संतुलन है ।

संतुलन कायम रखता है 
उलझन झनाझना देती है 
रेल चलती है 
रुकती है और 
फिर चलती है 
रेल चलने का नाम है 
प्रेम पलने का नाम है 
प्रेम में और रेल में असफल 
जिंदगी के हर मोर्चे पर नाकाम है ।

रेल चलो प्रेम चलाओ
दोनों में समर्पित हो जाओ 
रेल ठकाठक 
प्रेम चकाचक 
ठक ठक चक चक 
दुम चक दुम चक 
धक धक धक धक ।

प्रेम में धड़कता है दिल 
दिल में धड़ती है रेल 
एक जेल दूसरी फेल।

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