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दिव्यम की कलम से
सत्य हार जाये , असत्य हैं।
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अक्टूबर 21, 2015
पता नही अब कब आएगा वो दिन?
याद है अभी भी .... मुझे जब पापा के साथ बाइक पर बैठ कर मैला देखने जाता था। और पापा कहते थे, क्या खाओगे ? मै कहता मिठाई खाऊगा तो पापा उस दुकान की सबसे महंगी मिठाई किलो से तोलवाकर मेरे समाने रख देते थे.
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