सोनपुर मेला: एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला

गंगा और गंडक  के संगम पर  आयोजित  होने वाला एशिया  का सबसे बड़ा पशु मेला है सोनपुर मेला।कहा  जाता है कि चंद्रगुप्त मौर्य के समय से ही, यह पशु मेला का आयोजन होता रहा है।  उस समय इस  मेला  का आयोजन मध्य एशिया के रूप में  दूर के स्थानों से व्यापारियों को आकर्षित करने के लिए किया जाता था।
बिहार का ऐतिहासिक सोनपुर मेला आज भी सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। कहने को तो यह मेला एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला है लेकिन यहां आने वाले सैलानियों का आकर्षण नौटकी कंपनियों की बालाएं भी होती हैं। आने वाले इन बालाओं के मनमोहक नृत्य एवं शोख अदाओं के आज भी मुरीद हैं। वैसे इस मेले में थियेटर का आना कोई नई बात नहीं है। प्राचीन काल से लगने वाले इस मेले में थियेटर का भी अपना इतिहास रहा है। हरिहर क्षेत्र के लोगों का मानना है कि मेले में थियेटर की परंपरा प्रारंभ से है। इसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते थे। 
 आधुनिकता के इस दौर में न तो पहले की तरह गायन मंडलियां हैं और न ही वैसे वादक हैं। नौटंकी की सुसंस्कृत परंपरा भी समाप्त हो गई है।" वैसे एशिया के इस सबसे बड़े पशु मेले की प्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिशें बिहार पर्यटन विभाग द्वारा लगातार की जा रही है। मेले में गीत और संगीत कार्यक्रम की परंपरा बनाए रखने के लिए पर्यटन और जनसंर्पक विभाग मेला के मुख्य पंडालों में प्रत्येक शाम सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन करा रहा है। जिसमें प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर के कलाकार प्रस्तुति दे रहे हैं। मेले में आने वालों को आशा है कि इस मेले में फिर से ठुमरी, दादरा और कथक के बोल गूंजेंगे और घुंघुरुओं की झंकार इसके गौरवशाली इतिहास और परंपराओं को जिंदा रखेगी। बहरहाल, यह तो साफ है कि गौरवशाली इतिहास एवं धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक यह विश्वप्रसिद्घ हरिहरक्षेत्र सोनपुर मेला लोगों का उत्साह और उमंग आज भी बनाए हुए है। देसी और विदेशी सैलानियों को आकर्षित करने के लिए पर्यटन विभाग जोरदार मार्केटिंग भी कर रहा है। 

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