बेरोजगारी देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती........

जिस देश की अबादी 1.252 बिलियन के आकड़े छुरहा हो, वही दुसरी ओर, देश में 9.4 प्रतिशत लोग ‘बेरोजगारी’ जैसे शापित शब्द से गुजर रहे हैं , वैसे में, इस देश में विकास की बात कहां तकसार्थक है? कहा गया है कि “इस आर्थिक युग में मनुष्य आत्मसुख तब हीप्राप्त कर सकता हैं जब वह आर्थिक रुप से स्वयं को समर्थ महसूस करता हैं।“
देश में बेरोजगारी की समस्या के मूल कारणों पर यदि नजर डाला जायें, तो हम पाते हैं कि प्राय: लोग अन्य आर्थिक स्त्रोत के रुप में नौकरी को विशेष महत्व देते हैं।अतएव शिक्षित,अर्धशिक्षित और उच्चशिक्षित सभी वर्ग के लोग नौकरी को ही प्रथिमिकता ज्यादा देते है। अतः नौकरी की समस्या हमारे बीच राष्ट्रीय समस्या बनती जा रही हैं। जिसका मुख्य कारण हमारे देश की शिक्षा प्रणाली है, जो कि युवा पीढी को स्वावलंबी बनाने और उनमें आत्मविश्नास कायम करनें में नकाम रही हैं। अभी हाल के किसी मैगजीन में मैनें पढा कि हर तीन गैरजुयट्स में दो बेरोजगार हैं।

जैसा पहले से कहा गया है कि बेरोजगारी का नया रूप पढ़े-लिखे युवकों की बेरोजगारी का है और वह ज्यादा भयावह है। इसके साथ यह बात बड़ी तीव्रता से जुड़ी है कि जिन युवकों या उनके माता-पिता ने इस उम्मीद पर पढ़ाई-लिखाई पर अपनी हैसियत से ज्यादा पैसा खर्च कर दिया कि उनका बच्चा कमा कर सबकी भरपाई कर देगा। देश के औसत जिले में औसतन डेढ़ लाख युवक या प्रौढ़ बेरोजगार की श्रेणी में अनुमानित हैं। गांव के बेरोजगारों पर चूंकि प्रत्यक्ष निवेश नहीं हुआ, सो उनकी आकांक्षा की मात्रा कम है और उसके पास भाग्य या अपनी भौगोलिक परिस्थितियों का बहाना है। जिसके सहारे वह मन मसोस कर रह जाता है। 

लेकिन शहर का बेरोजगार ज्यादा बेचैन है। उधर गांव में न्यूनतम रोजगार के लिए ऐसा कुछ किया भी गया है कि कम से कम अकुशल और अर्धकुशल मजदूरों के बीच यह समस्या उतनी ज्यादा नहीं दिखती। उनकी मजदूरी की दर या उनके ज्यादा शोषण की बात हो, तो सोच-विचार के लिए उसे किसी और समय के लिए छोड़ना पड़ेगा। यानी निष्कर्ष यही निकलता है कि पढ़े-लिखे बेरोजगारों की फौज हमारे सामने चुनौती बन कर खड़ी है, हम सब को मिल कर उससे निजात पानी होगा। देश के उच्चशिक्षित समाज को कही नौकरी ढूढने से बेहतर खुद पर विश्ववास कर खुद का बिजनेस करना चाहिये ,ताकि इससे नीचे के पढे –लिखे युवक-युवतियों को नौकरी मिल सके।..........दिव्यम की कलम से........



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