आगामी बजट सत्र में सरकार क्या सौगात ले कर आती है , जनता के लिये................

.
कितने वादे को पुरा कर पायी ...बीजेपी

सरकार या सिर्फ भाषण और मिडिया में ही दिखती है? काम सरकार की..
आने वाले 23 फऱवरी से देश का बजट सत्र शुरू होने वाला है ,  जिससे  लेकर  हर कोई  उत्तसाहित्  है , चाहे वो मध्यवर्गीय परिवार हो या फिर उच्चवर्गीय परिवार।
बीते समय में सरकार ने जो काम किया , उसका भी जिक्र होगा। जहां तक मुझे याद है कुछ योजानाओ के बारे में मै आपके समीप रखना चाहुंगा।
जनधन योजना
केंद्र सरकार के 100 दिन पूरे होने पर प्रधानमंत्री जन धन योजना 28 अगस्त 2014 को शुरू की गई। इसका उदघाटन पीएम नरेंद्र मोदी ने किया। प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत 13.2 करोड़ बैंक खाते खोले गए। लोगों ने इसके तहत 11 हजार करोड़ रुपए बैंकों में जमा कराए। सरकार ने यह लक्ष्य छह महीने में हासिल कर लिया।

स्वच्छ भारत अभियान
पीएम मोदी के इस अभियान की पूरे देश में चर्चा हुई। पूरे देश को 'स्वच्छ भारत मिशन' अभियान के तहत अक्टूबर 2019 तक जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही स्वच्छ विद्यालय मिशन के अंतर्गत 15 अगस्त 2015 तक सभी स्कूलों को इससे जोड़ा जाएगा। पीएम की इस पहल में हर तबके ने साथ दिया। अभियान से बड़ी फिल्मी, और खेल जगत की हस्तियां भी जुड़ीं। सभी सांसदों से अपील की गई कि वे सासंद निधि का कम से कम 50 फ़ीसदी धन स्वच्छ भारत मिशन अभियान पर ख़र्च करें।

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना
9 मई को नरेंद्र मोदी ने कोलकाता में तीन बड़ी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का शुभारंभ किया। इस मौके पर उनके साथ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी मौजूद थीं। इनमें एक योजना पेंशन क्षेत्र की और दो बीमा योजनाएं हैं। सभी बैंक खाता धारकों के लिए ये तीनों योजनाएं हैं।  प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना 18 से 50 साल के लोगों के लिए है। इस योजना के लिए सालाना 330 रुपये का प्रीमियम देना होगा जबकि प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के लिए सलाना 12 रुपये का प्रीमियम देना होगा। दुर्घटना में अपाहिज होने पर भी पीड़ित को 2 लाख रुपए का दुर्घटना बीमा मिलेगा।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना
शिशु लिंग अनुपात में लगातार कमी रोकने के लिए सरकार ने 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' योजना शुरू की। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की घोषणा खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी 2015 को पानीपत हरियाणा में की थी। इसका मुख्य लक्ष्य है कन्या भ्रूण हत्या रोकना और बेटियों को पढ़ाना। वित्तमंत्री अरुण जेटली ने अपने बजट में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना के लिए 100 करोड़ की शुरुआती राशि की घोषणा की। इसके तहत सुकन्या समृद्धि योजना की शुरुआत की गई।
मेक इऩ इंडिया
'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम के तहत भारत को उत्पादन का केंद्र बनाने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है। इसके लिए मोदी ने देश के उद्योगपतियों के अलावा विदेशी दौरे के दौरान निवेशकों को भी लुभाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितंबर 2015 को इसका ऐलान किया। अपनी सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का आरंभ करते हुए मोदी ने वादा किया कि वह सुगम और प्रभावी सरकार देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि देश उच्च आर्थिक वृद्धि प्राप्त कर सके और रोजगार के अवसर बढ़ सकें।

विदेश नीति
सत्ता संभालने ही नरेंद्र मोदी का विदेश नीति पर खासा जोर रहा। मोदी ने ताबड़तोड़ विदेशी दौरे कर मजबूत रिश्ते की नींव को और मजबूत करने की कोशिश की। मोदी ने ना सिर्फ अमेरिका, जापान, फ्रांस, जर्मनी जैसे बड़े देशों पर ध्यान दिया बल्कि पड़ोसी छोटे देशों को भी तवज्जो दी। इसी के तहत उन्होंने अपना पहला दौरा भूटान का किया। फिर नेपाल भी पहुंचे। इसके बाद मोदी ने बड़े देशों का दौरा किया।
नमामि गंगे
गंगा की सफाई के लिए मोदी सरकार ने खाका तैयार किया। इसके लिए 2000 करोड़ रुपए का बजट भी रखा गया। मोदी सरकार बजट में गंगा नदी को स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए 'नमामि गंगे' मिशन के तहत 2037 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया।
कश्मीरी पंडितों की वापसी
कश्मीरी पंडितों की वापसी और पुनर्वास के लिए मोदी सरकार ने 500 करोड़ का पैकेज रखा। सरकार ने अप्रैल में अपनी मंशा साफ कर दी कि वो घाटी में कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास को लेकर गंभीर है। हालांकि इस पहल का घाटी में जोरदार विरोध हुआ और अलगाववादियों ने इसके खिलाफ बंद का ऐलान किया। जगह-जगह धरना-प्रदर्शन शुरू हुआ। 1989 के शुरू में आतंकी हिंसा में तेजी ने कश्मीरी पंडितों को कश्मीर घाटी का त्याग करने पर मजबूर कर दिया। सरकारी आंकड़ों के बकौल, पिछले 25 सालों में 59 हजार परिवारों के तकरीबन 3 लाख सदस्यों ने कश्मीर को छोड़ दिया था।

समय की पाबंदी
मोदी सरकार में मंत्रालय और सरकारी विभागों के वर्क कल्चर में बदलाव दिखा।, समय की पाबंदी पर जोर रहा। सख्ती बरती गई। अधिकतर ऑफिसों में बायोमैट्रिट अटेंडेंस सिस्टम दुरुस्त किया गया। इससे खासा असर पड़ा और सरकारी दफ्तरों में कर्मचारी समय पर पहुंचने लगे।
बुलेट ट्रेन
रेल बजट में बुलेट ट्रेन की घोषणा हुई। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में मुंबई-अहमदाबाद रूट पर इसे चलाने का ऐलान किया। 60 हजार करोड़ के इस प्रोजेक्ट पर हालांकि सवाल भी उठे पर पहली बार भारत में इसे चलाने की चर्चा ने जरूर जोर पकड़ा। चीन और जापान ने इसमें मदद की पेशकश भी की।

मोदी की इन योजनाओं ने खूब सुर्खियां बटोरीं और लोगों ने हाथोंहाथ भी लिया। लेकिन कई मामलों में मोदी सरकार की जमकर किरकिरी भी हुई। लैंड बिल के मामले पर मोदी सरकार को विपक्ष ने तो घेरा ही किसान भी नाखुश दिखे। किन माममों में घिरी सरकार, जानते हैं।
लैंड बिल
लैंड बिल पर संसद के बाहर और अंदर संग्राम मचा रहा। विपक्ष ने संसद में इस मुद्दे पर सरकार की जमकर आलोचना की। लोकसभा में तो बिल पास हो गया पर सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद ये बिल राज्यसभा में पास नहीं हो सका। विपक्ष आए दिन इसे लेकर सरकार पर हमला बोलता रहा। इसे लेकर संसद के बाहर मार्च भी निकाला गया। तमाम सर्वे में लोग इस बिल के खिलाफ ही नजर आए। इसे लेकर सरकार बैकफुट पर है और बिल अब तक पास नहीं हो पाया है।

काला धन
मोदी सरकार ने सरकार संभालते ही काले धन के मुद्दे पर एसआईटी का गठन कर खूब वाहवाही लूटी। लेकिन ये दौर ज्यादा नहीं चला। काले धन रखने वालों का नाम सार्वजनिक न करने की मजबूरी गिना रहे वित्त मंत्री अरुण जेटली की खूब किरकिरी हुई। अंत में सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को इनके नाम बताए। उधर, विपक्ष बार-बार नरेंद्र मोदी को निशाने पर लेता रहा और हर किसी को 15 लाख देने के वादे पर तंज कसता रहा।

महंगाई
महंगाई के मोर्चे पर सरकार का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा। महंगाई रोकने का वादा करने वाली मोदी सरकार को इसमें सफलता हाथ नहीं लगी। चीजों के दाम बढ़ते रहे हालांकि इतने बेकाबू नहीं हुए कि स्थिति जनविरोध तक पहुंच जाए। हां, इस दौरान सब्जियों के दाम काबू में रहे। सरकार की असली परीक्षा आने वाले दिनों में होगी।
किसानों का मुद्दा
किसानों के मुद्दे पर भी मोदी सरकार की जमकर किरकिरी हुई। फरवरी-मार्च में हुई जोरदार बारिश और ओलावृष्टि से पूरे उत्तर भारत में फसल बर्बाद हुई। सैकड़ों किसानों ने आत्महत्या की। मुआवजे के नाम पर किसानों के साथ मजाक हुआ और कहीं-कहीं तो उन्हें 100-100 रुपये के चेक भी थमाए गए। सरकारी मशीनरी पूरी तरह फेल नजर आई। किसानों का हालचाल लेने सरकारी नुमाइंदे नहीं पहुंचे।

पेट्रोल-डीजल
मोदी सरकार के दौरान पेट्रोल-डीजल के दाम शुरुआत में खासी कमी आई। लेकिन हाल ही में 15 दिन के भीतर दूसरी बार दामों में  भारी बढ़ोतरी हुई। 15 मई को ही पेट्रोल के दाम 3 रुपये और डीजल के दाम में 2 रुपये की बढ़ोतरी हुई। 15 दिनों के भीतर ही पेट्रोल 7 रुपया और डीजल 5 रुपया महंगा हुआ।

यहां तक काम मुझे याद है पर कितना सफल रहा हैं यह काम /योजना सकरार की यह बात सिर्फ जनता जानती है, या फिर इस देश के पढे-लिखे बुद्धिजीवी......
अब देखना यह कि आगामी बजट सत्र में सरकार क्या सौगात ले कर आती है , जनता के लिये.................                                                                                             दिव्यम की कलम से-
































टिप्पणियाँ