एक सत्य .....मौत.......

कुछ विद्वानो का कहना कि मनुष्य , इस दुनिया का सबसे शक्तिशाली प्राणी हैं। समय के साथ-साथ मनुष्य ने वो सभी चीजे हासिल कर लिया । जिन चीजो की उसे आवश्कता थीं। कहा जाता है कि मनुष्य ने जिस तरह से अपने –आप को विकास किया, उसी तरह से अपने आप को हिंसात्मक भी बनता चला गया।


भौतिक सुख पाने की लालसा ने उसे कही का नही छोड़ा , जैसे – जैसे लालसा बढता गया । वो हिंसात्मक कार्य करना आरंभ कर दिया। जिसका हमने एक बार नहीं बार –बार अलग –अलग रुपों में खमियजा भुगता हैं। एक सत्य .....मौत..........जिससे हर कोई जनाते हुये , भी अनजाना बनने का ढोंग करता फिरता हैं


आखिर क्यों?..... क्योंकि वह वास्तिवक जिंदगी से दुर होता जा रहा हैं। संसार में काल्पनिक सुख से इस कदर जुड़ गया है कि पुछो मत। पर एक दिन उसे सच्चाई से लड़ना हैं। जब सच्चाई सामने आता है। तो उसे वास्तिविक जिंदगी समझ आने लगता हैं। लेकिन तब तक बहुत देर हो गया होता हैं। उस समय जुबान से सिर्फ एक ही लफ्ज निकलता....काश ! यह कर लिया होता....पर संभव नहीं होता  , जब निकलता हैं लफ्ज।

इस दुनिया के जितने भी धर्मग्रंथ हैं,  सभी धर्मग्रंथ एक ही बात से लड़ना सिखा सिखाती हैं। पर हमारे पास फुर्सत कहां , जो हम पढ सके , इन ग्रंथ को । पढे क्यों ? न तो हमें कोई धर्मग्रंथ अच्छी पगार वाली नौकरी थोड़ी दिलवा देगीं। सही भी हैं। लेकिन एक सत्य यह भी
जब अंतिम समय आता है तो वही धर्मग्रंथ के सहारे हम औरो को मुक्ति दिलवाते हैं। तो क्यो न हम पहले अपने मुक्ति का रास्ता चुन ले।
































टिप्पणियाँ